भोपाल से कपिल कुमार की रिपोर्ट
भोपाल। आयुष्मान भारत निरामयम योजना के तहत प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने और मरीजों को बेहतर एवं मानक उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। स्वास्थ्य सुरक्षा परिषद की हालिया बैठक में तय किया गया है कि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में अब केवल पूर्ण एनएबीएच (नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स) प्रमाणन प्राप्त निजी अस्पतालों को ही आयुष्मान योजना से संबद्ध किया जाएगा। बिना फुल एनएबीएच मान्यता वाले नए अस्पतालों को योजना में शामिल नहीं किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि आयुष्मान योजना के तहत लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और मानक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी दिशा में अस्पतालों के लिए एनएबीएच प्रमाणन को अनिवार्य बनाने का निर्णय लिया गया है। इससे अस्पतालों में उपचार व्यवस्था, मरीजों की सुरक्षा, स्वच्छता, चिकित्सा प्रबंधन तथा सेवा गुणवत्ता के मानकों को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा।

जानकारी के अनुसार पहले से योजना से जुड़े ऐसे अस्पताल, जिनके पास पूर्ण एनएबीएच प्रमाणन नहीं है, उन्हें मुख्यमंत्री के निर्देश पर मार्च माह में छह माह की अतिरिक्त मोहलत दी गई थी। यह अवधि सितंबर में समाप्त हो जाएगी। निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक मान्यता प्राप्त नहीं करने वाले अस्पतालों के विरुद्ध योजना से पृथक्करण की कार्रवाई की जा सकती है। इससे पहले भी राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा ऐसे कई अस्पतालों को पैनल से हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसे अस्पताल संचालकों के अनुरोध पर कुछ समय के लिए स्थगित किया गया था।
बैठक में आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। जिन आदिवासी ब्लॉकों में आयुष्मान योजना से संबद्ध कोई निजी अस्पताल उपलब्ध नहीं है, वहां मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) की अनुशंसा के आधार पर अस्पतालों को मान्यता प्रदान की जा सकेगी। ऐसे क्षेत्रों में न्यूनतम 10 बिस्तरों वाले अस्पतालों को भी योजना से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त किया गया है। वर्तमान में प्रदेश के लगभग 100 ब्लॉकों में आयुष्मान योजना से संबद्ध एक भी निजी अस्पताल नहीं होने के कारण मरीजों को उपचार के लिए दूसरे जिलों पर निर्भर रहना पड़ता है।

स्वास्थ्य सुरक्षा परिषद ने अस्पतालों की संबद्धता और अनुबंध नवीनीकरण प्रक्रिया को भी सरल एवं पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया है। अब पात्र अस्पतालों के अनुबंध का स्वतः नवीनीकरण किया जाएगा, जिससे अस्पताल संचालकों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पिछले वर्ष संबद्धता और नवीनीकरण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं एवं लेनदेन के आरोप सामने आने के बाद इस व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की पहल की गई है।
इधर राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) ने योजना के नियमों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का उल्लंघन करने वाले नौ निजी अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें आयुष्मान योजना के पैनल से बाहर कर दिया है। जांच के दौरान इन अस्पतालों में कई प्रकार की अनियमितताएं और दिशा-निर्देशों की अवहेलना सामने आई थी। कार्रवाई से पूर्व सभी अस्पतालों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया, लेकिन वे संतोषजनक जवाब अथवा आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।
योजना से बाहर किए गए अस्पतालों में भोपाल के तीन अस्पतालों सहित इंदौर, ग्वालियर, नीमच, गुना, खरगोन और मंडला जिले के एक-एक निजी अस्पताल शामिल हैं। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि आदेश जारी होने से पहले भर्ती किए गए मरीजों का उपचार पूर्ववत जारी रहेगा, लेकिन संबंधित अस्पताल अब आयुष्मान योजना के तहत नए मरीज भर्ती नहीं कर सकेंगे। आयुष्मान भारत निरामयम मध्यप्रदेश की कार्यपालन अधिकारी भव्या त्रिपाठी के अनुसार योजना से जुड़े सभी अस्पतालों के लिए अनुबंध की शर्तों और एसओपी का पालन अनिवार्य है तथा नियमों के उल्लंघन पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। सरकार के इन निर्णयों को आयुष्मान योजना में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
